Jaane kyon zind…

Jaane kyon zindagi ki raftar tham si gayi hai. Sarpat daudti car ko break lag si gayi hai. Bas thodi door rah gayi thi manzil, par kyon yeh baarish padne lagi hai.

Yeh dharti yeh ambar, sab mere liye hai. Jahan ki sab khushiyan, mere liye hain. Par kyon yeh baarish padne lagi hai.

Uth. Jaag. Yeh baarish nahi hai. Yeh hai teri pariksha, par teri manzil wahin hai. Na doori badi hai, na shakti ghati hai, toh yeh chinta kyon aane lagi hai.

Badna hai aage. Is manzil ko chhona hai. Yeh manzil sirf ab mere liye hai. Ji karta hai is manzil ko chho loon, bikheru khushiyan aur sabke aansoo le loon.

Memories of Life / ज़िन्दगी की सड़क

Life is made of various events whether happy or sad, success or failure, ideal or inspirational. Such events could be your’s experience or others.

Memories of Life is a showcase of feelings in form of poetry or shayari or stories or open letters or micro tales or haiku or whatever way you can express yourself better.

ज़िन्दगी छोटे छोटे किस्सों से मिलकर बनती है चाहे वो किस्से ख़ुशी के हों या दुःख के, सफलता के हों या विफलता के. किस्से आपके खुद के भी हो सकते हैं या किसी और के.

ज़िन्दगी की सड़क आपके जज्बातों को पिरोने की एक कोशिश है. आप चाहे तो कविता, शायरी लिखिए या लिखिए कहानी. आप चाहें तो खुले पत्र,सूक्ष्म कहानियाँ या हाइकू या जैसे भी आप अच्छे से अपनी भावनाओं को दिखा सकें दिखाईये.

Poster from Publisher

ई-वोटिंग

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रावायण – सिद्धार्थ अरोरा और मनीष खण्डेलवाल

कहते हैं कि इस दुनिया में हर इंसान में कुछ अच्छाइयाँ और कुछ बुराइयाँ होती हैं पर हम हमेशा उस चेहरे पर ज़्यादा ध्यान देते हैं जो हमें मीडिया द्वारा या आस पास के लोगों या परिवारजनों द्वारा हमें किसी व्यक्ति के बारे में दिखाया जाता हैं. अपना विवेक और …

टेक 3 – कँवल शर्मा

कँवल जी का सिर्फ ये तीसरा ही उपन्यास था पर अब तक कँवल जी उपन्यास जगत में एक मकबूल नाम बन चुके थे. प्रथम उपन्यास मुझे बहुत पसंद आया था और दूसरा थोडा कम पर पसंद वो भी आया था. जब यह उपन्यास आया था तो मैं काफ़ी परेशानियों के …

सेकंड चांस – कँवल शर्मा

वन शॉट के रिलीज़ होते ही मेरे मित्र कँवल शर्मा जी एक दम से बुलंदियों को छू चुके थे. मेरे सहित सभी की उम्मीदें कँवल जी से बहुत अधिक हो गयी थी. हम सब इनके अगले उपन्यास का इंतज़ार कर रहे थे. अगला उपन्यास था सेकंड चांस. उपन्यास के चर्चे …

देजा वू – कँवल शर्मा

पिछले साल में कँवल शर्मा जी की एक क़िताब आई थी ‘देजा वू’. क़िताब आने से पहले ही काफ़ी मशहूर हो गयी थी. कारण था इसका शीर्षक और किताब का विषय ‘देजा वू’. हिंदी भाषियों के लिए ये शब्द इतना कॉमन नहीं था, इस शब्द के अर्थ की कई जगह …