रावायण – सिद्धार्थ अरोरा और मनीष खण्डेलवाल

कहते हैं कि इस दुनिया में हर इंसान में कुछ अच्छाइयाँ और कुछ बुराइयाँ होती हैं पर हम हमेशा उस चेहरे पर ज़्यादा ध्यान देते हैं जो हमें मीडिया द्वारा या आस पास के लोगों या परिवारजनों द्वारा हमें किसी व्यक्ति के बारे में दिखाया जाता हैं. अपना विवेक और तर्क हम ज़्यादातर प्रयोग ही नहीं करते. लोग अमूमन अपने फ़ायदे के लिए, क़ानून का सहारा अपनी तरफ़ मोड़ने के लिए जमकर झूठ बोलते हैं दुष्प्रचार करते हैं.

क्या जरुरी है कि राम नाम का व्यक्ति ईमानदार ही होगा या फिर रावण नाम किसी पापी का ही होगा. सैफीना के बच्चे ‘तैमूर’ का विवाद तो कोई भी नहीं भूला होगा. आखिर क्यूँ यह कहा जाता है कि नाम में क्या रखा है?

यह कहानी नए ज़माने में एक इलाक़े के कुछ बाशिन्दों की है जिसमें कुछ को लोग राम जैसा अच्छा मानते हैं और कुछ को लोग रावण जैसा बुरा. इन बाशिन्दों की कहानी उसी इलाक़े में हो रही राम लीला के समानांतर चलती है. अलग अलग मौक़ों पर लोगों के असली नकली चेहरे सामने आते रहते हैं. रिश्तों के मायने कहानी के साथ साथ बदलते रहते हैं. यह घटनाएँ कहानी में बहुत सक्षम तरीक़े से, तेजरफ़्तार घटनाक्रम में दिखायी गयी हैं. हर घटना कोई ट्विस्ट लाती है और कुछ ऐसा होता है जो आप सोच भी नहीं सकते पर ऐसी घटनाएँ, परिस्थितियां हमारे अड़ोस पड़ोस में होती ही रहती हैं.

अब कहानी तो आपको मैं नहीं बताऊँगा पर कहानी आपको झकझोरने में सक्षम है और सोचने पर मजबूर करती है.

कहानी मस्त लिखी है. हालाँकि कहानी पढ़कर मुझे ये लगा कि इसकी लम्बाई लगभग दोगनी होनी चाहिए थी. कुछ घटनाओं को थोड़ा और विस्तार देने की ज़रूरत थी. कहानी का क्लाइमैक्स थोड़ा फ़िल्मी और पूरी कहानी की स्पीड के मुक़ाबले धीमा लगा.

कुल मिलाकर इस क़िताब ने मेरा भरपूर मनोरंजन किया.

इस किताब के बारे में और जानकारी आप इस लिंक से प्राप्त कर सकते हैं:

https://amzn.to/2DF7WRk

Ravayan cover Page
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
1 Comment
Most Voted
Newest Oldest
Inline Feedbacks
View all comments
नयना कक्कड़ कपूर
नयना कक्कड़ कपूर
1 year ago

बहुत सुदर

Back to Top
error: don\'t copy but please share...
Please Share! No Copy-Paste
1
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x